महाभारत 6.2.6
यदि त्विच्छसि संग्रामे द्रष्टुमेनं विशां पतेचक्षुर्ददानि ते हन्त युद्धमेतन्निशामय
yadi tvicchasi saṃgrāme draṣṭumenaṃ viśāṃ patecakṣurdadāni te hanta yuddhametanniśāmaya
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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