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महाभारत 6.31.21
ते तं भुक्त्वा स्वर्गलोकं विशालं; क्षीणे पुण्ये मर्त्यलोकं विशन्तिएवं त्रयीधर्ममनुप्रपन्ना; गतागतं कामकामा लभन्ते
te taṃ bhuktvā svargalokaṃ viśālaṃ; kṣīṇe puṇye martyalokaṃ viśantievaṃ trayīdharmamanuprapannā; gatāgataṃ kāmakāmā labhante
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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