महाभारत 6.31.2
राजविद्या राजगुह्यं पवित्रमिदमुत्तमम्प्रत्यक्षावगमं धर्म्यं सुसुखं कर्तुमव्ययम्
rājavidyā rājaguhyaṃ pavitramidamuttamampratyakṣāvagamaṃ dharmyaṃ susukhaṃ kartumavyayam
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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