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महाभारत 6.34.1
अर्जुन उवाच · arjuna uvāca
एवं सततयुक्ता ये भक्तास्त्वां पर्युपासतेये चाप्यक्षरमव्यक्तं तेषां के योगवित्तमाः
evaṃ satatayuktā ye bhaktāstvāṃ paryupāsateye cāpyakṣaramavyaktaṃ teṣāṃ ke yogavittamāḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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