महाभारत 6.60.72
एवं तदभवद्युद्धं दिवसं भरतर्षभपाण्डवानां कुरूणां च पुरस्कृत्य घटोत्कचम्
evaṃ tadabhavadyuddhaṃ divasaṃ bharatarṣabhapāṇḍavānāṃ kurūṇāṃ ca puraskṛtya ghaṭotkacam
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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