महाभारत 6.79.36
ततः प्राग्ज्योतिषो राजन्प्रहसन्निव भारततस्याश्वांश्चतुरः संख्ये पातयामास सायकैः
tataḥ prāgjyotiṣo rājanprahasanniva bhāratatasyāśvāṃścaturaḥ saṃkhye pātayāmāsa sāyakaiḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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