महाभारत 6.90.11
नानाविधानि शस्त्राणि विसृजन्तो जये रताःनदन्तो भैरवान्नादांस्त्रासयन्तश्च भूमिमाम्
nānāvidhāni śastrāṇi visṛjanto jaye ratāḥnadanto bhairavānnādāṃstrāsayantaśca bhūmimām
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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