महाभारत 6.90.39
प्रादुश्चक्रे महामायां घोररूपां सुदारुणाम्मोहयन्समरे द्रौणिं मायावी राक्षसाधिपः
prāduścakre mahāmāyāṃ ghorarūpāṃ sudāruṇāmmohayansamare drauṇiṃ māyāvī rākṣasādhipaḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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