महाभारत 7.111.7
तस्य भीमो हयान्हत्वा विनिहत्य च सारथिम्प्रजहास महाहासं कृते प्रतिकृतं पुनः
tasya bhīmo hayānhatvā vinihatya ca sārathimprajahāsa mahāhāsaṃ kṛte pratikṛtaṃ punaḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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