महाभारत 7.128.13
नादयन्रथघोषेण कम्पयन्निव मेदिनीम्अभ्यवर्तत पुत्रस्ते पाण्डवानामनीकिनीम्
nādayanrathaghoṣeṇa kampayanniva medinīmabhyavartata putraste pāṇḍavānāmanīkinīm
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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