महाभारत 7.140.26
अथान्यद्धनुरादाय धर्मपुत्रो युधिष्ठिरःहार्दिक्यं दशभिर्बाणैर्बाह्वोरुरसि चार्पयत्
athānyaddhanurādāya dharmaputro yudhiṣṭhiraḥhārdikyaṃ daśabhirbāṇairbāhvorurasi cārpayat
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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