महाभारत 7.140.27
माधवस्तु रणे विद्धो धर्मपुत्रेण मारिषप्राकम्पत च रोषेण सप्तभिश्चार्दयच्छरैः
mādhavastu raṇe viddho dharmaputreṇa māriṣaprākampata ca roṣeṇa saptabhiścārdayaccharaiḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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