महाभारत 7.140.38
ततः शरशतेनाजौ धर्मपुत्रमवाकिरत्कवचं चास्य संक्रुद्धः शरैस्तीक्ष्णैरदारयत्
tataḥ śaraśatenājau dharmaputramavākiratkavacaṃ cāsya saṃkruddhaḥ śaraistīkṣṇairadārayat
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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