महाभारत 7.151.16तस्यापि रथनिर्घोषो महामेघरवोपमःतस्यापि सुमहच्चापं दृढज्यं बलवत्तरम्tasyāpi rathanirghoṣo mahāmegharavopamaḥtasyāpi sumahaccāpaṃ dṛḍhajyaṃ balavattaramइस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।पुस्तक में खोलेंयह श्लोक साझा करें