महाभारत 7.158.44
यदि शत्रुवधे न्याय्यो भवेत्कर्तुं च पाण्डवैःद्रोणकर्णौ रणे पूर्वं हन्तव्याविति मे मतिः
yadi śatruvadhe nyāyyo bhavetkartuṃ ca pāṇḍavaiḥdroṇakarṇau raṇe pūrvaṃ hantavyāviti me matiḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें