महाभारत 7.158.62
सेवेथाः परमप्रीतो यतो धर्मस्ततो जयःइत्युक्त्वा पाण्डवं व्यासस्तत्रैवान्तरधीयत
sevethāḥ paramaprīto yato dharmastato jayaḥityuktvā pāṇḍavaṃ vyāsastatraivāntaradhīyata
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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