महाभारत 7.166.33स तथाहं करिष्यामि यथा भरतसत्तमपरलोकगतस्यापि गमिष्याम्यनृणः पितुःsa tathāhaṃ kariṣyāmi yathā bharatasattamaparalokagatasyāpi gamiṣyāmyanṛṇaḥ pituḥइस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।पुस्तक में खोलेंयह श्लोक साझा करें