महाभारत 7.166.39
अद्य सर्वा दिशो राजन्धाराभिरिव संकुलाःआवृताः पत्रिभिस्तीक्ष्णैर्द्रष्टारो मामकैरिह
adya sarvā diśo rājandhārābhiriva saṃkulāḥāvṛtāḥ patribhistīkṣṇairdraṣṭāro māmakairiha
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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