महाभारत 7.166.60
तथोक्त्वा द्रोणपुत्रोऽपि तदोपस्पृश्य भारतप्रादुश्चकार तद्दिव्यमस्त्रं नारायणं तदा
tathoktvā droṇaputro'pi tadopaspṛśya bhārataprāduścakāra taddivyamastraṃ nārāyaṇaṃ tadā
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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