महाभारत 7.167.22
मन्ये वज्रधरस्यैष निनादो भैरवस्वनःद्रोणे हते कौरवार्थं व्यक्तमभ्येति वासवः
manye vajradharasyaiṣa ninādo bhairavasvanaḥdroṇe hate kauravārthaṃ vyaktamabhyeti vāsavaḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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