महाभारत 7.167.38
न्यस्तशस्त्रमधर्मेण घातयित्वा गुरुं भवान्रक्षत्विदानीं सामात्यो यदि शक्नोषि पार्षतम्
nyastaśastramadharmeṇa ghātayitvā guruṃ bhavānrakṣatvidānīṃ sāmātyo yadi śaknoṣi pārṣatam
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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