महाभारत 7.168.3
मुनिर्यथारण्यगतो भाषसे धर्मसंहितम्न्यस्तदण्डो यथा पार्थ ब्राह्मणः संशितव्रतः
muniryathāraṇyagato bhāṣase dharmasaṃhitamnyastadaṇḍo yathā pārtha brāhmaṇaḥ saṃśitavrataḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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