महाभारत 7.168.5
स भवान्क्षत्रियगुणैर्युक्तः सर्वैः कुलोद्वहःअविपश्चिद्यथा वाक्यं व्याहरन्नाद्य शोभसे
sa bhavānkṣatriyaguṇairyuktaḥ sarvaiḥ kulodvahaḥavipaścidyathā vākyaṃ vyāharannādya śobhase
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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