महाभारत 7.4.2
समुद्र इव सिन्धूनां ज्योतिषामिव भास्करःसत्यस्य च यथा सन्तो बीजानामिव चोर्वरा
samudra iva sindhūnāṃ jyotiṣāmiva bhāskaraḥsatyasya ca yathā santo bījānāmiva corvarā
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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