महाभारत 7.41.10
किं दत्तं हुतमिष्टं वा सुतप्तमथ वा तपःसिन्धुराजेन येनैकः क्रुद्धान्पार्थानवारयत्
kiṃ dattaṃ hutamiṣṭaṃ vā sutaptamatha vā tapaḥsindhurājena yenaikaḥ kruddhānpārthānavārayat
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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