महाभारत 7.41.5
ततस्तद्विमुखं दृष्ट्वा तव सूनोर्महद्बलम्जामाता तव तेजस्वी विष्टम्भयिषुराद्रवत्
tatastadvimukhaṃ dṛṣṭvā tava sūnormahadbalamjāmātā tava tejasvī viṣṭambhayiṣurādravat
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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