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महाभारत 7.46.7
तांस्तु सर्वान्महेष्वासान्सर्वविद्यासु निष्ठितान्व्यष्टम्भयद्रणे बाणैः सौभद्रः परवीरहा
tāṃstu sarvānmaheṣvāsānsarvavidyāsu niṣṭhitānvyaṣṭambhayadraṇe bāṇaiḥ saubhadraḥ paravīrahā
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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