महाभारत 7.7.16
उत्कृत्य च शिरांस्युग्रो बाहूनपि सभूषणान्कृत्वा शून्यान्रथोपस्थानुदक्रोशन्महारथः
utkṛtya ca śirāṃsyugro bāhūnapi sabhūṣaṇānkṛtvā śūnyānrathopasthānudakrośanmahārathaḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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