महाभारत 7.7.21
तान्वै सरथहस्त्यश्वान्प्राहिणोद्यमसादनम्द्रोणोऽचिरेणाकरोच्च महीं शोणितकर्दमाम्
tānvai sarathahastyaśvānprāhiṇodyamasādanamdroṇo'cireṇākarocca mahīṃ śoṇitakardamām
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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