महाभारत 7.7.34
द्यां धरां खं दिशो वारि प्रदिशश्चानुनादयन्अहो धिगिति भूतानां शब्दः समभवन्महान्
dyāṃ dharāṃ khaṃ diśo vāri pradiśaścānunādayanaho dhigiti bhūtānāṃ śabdaḥ samabhavanmahān
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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