महाभारत 7.7.4
केकया भीमसेनश्च सौभद्रोऽथ घटोत्कचःयुधिष्ठिरो यमौ मत्स्या द्रुपदस्यात्मजास्तथा
kekayā bhīmasenaśca saubhadro'tha ghaṭotkacaḥyudhiṣṭhiro yamau matsyā drupadasyātmajāstathā
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें