महाभारत 7.76.20
व्याघ्रसिंहगजाकीर्णानतिक्रम्येव पर्वतान्अदृश्येतां महाबाहू यथा मृत्युजरातिगौ
vyāghrasiṃhagajākīrṇānatikramyeva parvatānadṛśyetāṃ mahābāhū yathā mṛtyujarātigau
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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