महाभारत 7.76.26
द्रोणग्राहह्रदान्मुक्तौ शक्त्याशीविषसंकटात्अयःशरोग्रमकरात्क्षत्रियप्रवराम्भसः
droṇagrāhahradānmuktau śaktyāśīviṣasaṃkaṭātayaḥśarogramakarātkṣatriyapravarāmbhasaḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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