महाभारत 7.76.35
तौ तु सैन्धवमालोक्य वर्तमानमिवान्तिकेसहसा पेततुः क्रुद्धौ क्षिप्रं श्येनाविवामिषे
tau tu saindhavamālokya vartamānamivāntikesahasā petatuḥ kruddhau kṣipraṃ śyenāvivāmiṣe
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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