महाभारत 7.76.3
ये गताः पाण्डवं युद्धे क्रोधामर्षसमन्विताःतेऽद्यापि न निवर्तन्ते सिन्धवः सागरादिव
ye gatāḥ pāṇḍavaṃ yuddhe krodhāmarṣasamanvitāḥte'dyāpi na nivartante sindhavaḥ sāgarādiva
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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