महाभारत 7.76.7
विमुक्तौ शस्त्रसंबाधाद्द्रोणानीकात्सुदुर्भिदात्अदृश्येतां महात्मानौ कालसूर्याविवोदितौ
vimuktau śastrasaṃbādhāddroṇānīkātsudurbhidātadṛśyetāṃ mahātmānau kālasūryāvivoditau
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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