महाभारत 8.16.38
रूपाण्यत्यर्थकाम्यानि द्विरदाश्वनृणां नृपसमुन्नानीव वस्त्राणि प्रापुर्दुर्दर्शतां परम्
rūpāṇyatyarthakāmyāni dviradāśvanṛṇāṃ nṛpasamunnānīva vastrāṇi prāpurdurdarśatāṃ param
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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