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महाभारत 8.2.11
यस्य वै युधि संत्रासात्कुन्तीपुत्रो धनंजयःनिवर्तते सदामर्षात्सिंहात्क्षुद्रमृगो यथा
yasya vai yudhi saṃtrāsātkuntīputro dhanaṃjayaḥnivartate sadāmarṣātsiṃhātkṣudramṛgo yathā
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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