महाभारत 8.2.17
एवमुक्ते महाराज कर्णो वैकर्तनो नृपःसिंहनादं विनद्योच्चैः प्रायुध्यत महाबलः
evamukte mahārāja karṇo vaikartano nṛpaḥsiṃhanādaṃ vinadyoccaiḥ prāyudhyata mahābalaḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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