महाभारत 8.25.9
यत्तु विद्वन्प्रवक्ष्यामि प्रत्ययार्थमहं तवआत्मनः स्तवसंयुक्तं तन्निबोध यथातथम्
yattu vidvanpravakṣyāmi pratyayārthamahaṃ tavaātmanaḥ stavasaṃyuktaṃ tannibodha yathātatham
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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