महाभारत 8.41.4
कौरवान्द्रवतो ह्येष कर्णो धारयतेऽर्जुनअन्तकप्रतिमो वेगे शक्रतुल्यपराक्रमः
kauravāndravato hyeṣa karṇo dhārayate'rjunaantakapratimo vege śakratulyaparākramaḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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