महाभारत 8.41.7
सिंहनादरवाश्चात्र प्रादुरासन्समागमेउभयोः सेनयो राजन्मृत्युं कृत्वा निवर्तनम्
siṃhanādaravāścātra prādurāsansamāgameubhayoḥ senayo rājanmṛtyuṃ kṛtvā nivartanam
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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