महाभारत 8.43.2
एष पाण्डव ते भ्राता धार्तराष्ट्रैर्महाबलैःजिघांसुभिर्महेष्वासैर्द्रुतं पार्थानुसर्यते
eṣa pāṇḍava te bhrātā dhārtarāṣṭrairmahābalaiḥjighāṃsubhirmaheṣvāsairdrutaṃ pārthānusaryate
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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