महाभारत 8.43.34
एते नदन्ति कौरव्या दृष्ट्वा कर्णस्य विक्रमम्त्रासयन्तो रणे पार्थान्सृञ्जयांश्च सहस्रशः
ete nadanti kauravyā dṛṣṭvā karṇasya vikramamtrāsayanto raṇe pārthānsṛñjayāṃśca sahasraśaḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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