महाभारत 8.43.75
अक्षौहिण्यस्तथा तिस्रो धार्तराष्ट्रस्य संहताःक्रुद्धेन नरसिंहेन भीमसेनेन वारिताः
akṣauhiṇyastathā tisro dhārtarāṣṭrasya saṃhatāḥkruddhena narasiṃhena bhīmasenena vāritāḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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