महाभारत 8.43.8
एते बहुत्वात्त्वरिताः पुनर्गच्छन्ति पाण्डवम्समुद्रमिव वार्योघाः प्रावृट्काले महारथाः
ete bahutvāttvaritāḥ punargacchanti pāṇḍavamsamudramiva vāryoghāḥ prāvṛṭkāle mahārathāḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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