महाभारत 8.59.10
ततो म्लेच्छाः स्थितैर्मत्तैस्त्रयोदशशतैर्गजैःपार्श्वतोऽभ्यहनन्पार्थं तव पुत्रस्य शासनात्
tato mlecchāḥ sthitairmattaistrayodaśaśatairgajaiḥpārśvato'bhyahananpārthaṃ tava putrasya śāsanāt
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें