महाभारत 8.59.18
अश्वारोहा महाराज धावमानास्ततस्ततःतत्र तत्रैव दृश्यन्ते पतिताः पार्थसायकैः
aśvārohā mahārāja dhāvamānāstatastataḥtatra tatraiva dṛśyante patitāḥ pārthasāyakaiḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें