महाभारत 8.59.2
कृष्णः श्वेतान्महावेगानश्वान्कनकभूषणान्मुक्ताजालप्रतिच्छन्नान्प्रैषीत्कर्णरथं प्रति
kṛṣṇaḥ śvetānmahāvegānaśvānkanakabhūṣaṇānmuktājālapraticchannānpraiṣītkarṇarathaṃ prati
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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