महाभारत 8.59.38कुरवो हि महाराज निर्विषाः पन्नगा इवकर्णमेवोपलीयन्त भयाद्गाण्डीवधन्वनःkuravo hi mahārāja nirviṣāḥ pannagā ivakarṇamevopalīyanta bhayādgāṇḍīvadhanvanaḥइस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।पुस्तक में खोलेंयह श्लोक साझा करें